भारतीय संस्कृति एवं विरासत: RO/ARO परीक्षा के लिए सम्पूर्ण नोट्स और महत्वपूर्ण प्रश्न
“संस्कृति किसी राष्ट्र का अतीत ही नहीं, बल्कि उसकी जीवंत आत्मा होती है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की RO/ARO परीक्षा में भारतीय कला एवं संस्कृति का खंड आपकी सफलता की राह को सुगम बनाता है।”
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) की प्रारंभिक (Prelims) एवं मुख्य (Mains) परीक्षा में सामान्य अध्ययन (General Studies – Paper I) के अंतर्गत भारतीय कला एवं संस्कृति (Indian Art and Culture) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्कोरिंग विषय है।
इस विषय से प्राचीन एवं मध्यकालीन वास्तुकला (Architecture), शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत (Classical Dances & Music), चित्रकला (Paintings), प्रमुख त्यौहार, मेले एवं यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थलों (World Heritage Sites) से जुड़े प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं।
इस विस्तृत लेख में हम RO/ARO परीक्षा की दृष्टि से भारतीय संस्कृति के सभी प्रमुख पहलुओं, महत्वपूर्ण तथ्यों, ऐतिहासिक शैलियों और 10 बहुविकल्पीय अभ्यास प्रश्नों (MCQs) पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
1. RO/ARO परीक्षा में भारतीय कला एवं संस्कृति का महत्व और पाठ्यक्रम
RO/ARO की प्रारंभिक परीक्षा के GS Paper-1 में इतिहास और संस्कृति के संयुक्त खंड से लगभग 15 से 20 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें से 5 से 8 प्रश्न सीधे तौर पर भारतीय कला, मंदिर स्थापत्य, नृत्यों और लोक कलाओं पर आधारित होते हैं।
मुख्य पाठ्यक्रम बिंदु (Syllabus Highlights):
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स्थापत्य कला (Architecture): मंदिर निर्माण शैलियां (नागर, द्रविड़, वेसर), बौद्ध एवं जैन स्थापत्य (स्तूप, चैत्य, विहार), सल्तनत एवं मुगलकालीन वास्तुकला।
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शास्त्रीय एवं लोक नृत्य (Dances of India): भारत के 8 शास्त्रीय नृत्य एवं विभिन्न राज्यों तथा उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोक नृत्य।
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भारतीय संगीत एवं चित्रकला (Music & Paintings): शास्त्रीय संगीत की शैलियां (ध्रुपद, ख्याल), प्रमुख चित्रकला शैलियां (अजंता, मुगल, राजपूत, मधुबनी, पहाड़ी)।
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यूनेस्को की अमूर्त एवं मूर्त विरासतें (UNESCO Cultural Heritage): भारत के विश्व धरोहर स्थल और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage)।
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उत्तर प्रदेश विशेष संस्कृति (UP Special Culture): यूपी के प्रमुख मेले, त्यौहार, लोकगीत (कजरी, बिरहा, रसिया), और सांस्कृतिक घराने (लखनऊ, बनारस घराना)।
2. स्थापत्य कला एवं मंदिर निर्माण शैलियां (Indian Temple Architecture)
भारतीय मंदिर स्थापत्य को मुख्य रूप से तीन प्रमुख शैलियों में विभाजित किया गया है:
┌─────────────────────────────────┐
│ मंदिर निर्माण शैलियाँ │
└────────────────┬────────────────┘
│
┌─────────────────────────┼─────────────────────────┐
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│ नागर शैली │ │ द्रविड़ शैली │ │ वेसर शैली │
│ (उत्तर भारत) │ │ (दक्षिण भारत) │ │ (मध्य/दक्कन) │
└─────────────────┘ └─────────────────┘ └─────────────────┘
1. नागर शैली (Nagara Style)
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क्षेत्र: हिमालय से लेकर विंध्य पर्वतमाला तक (उत्तर भारत)।
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विशेषताएं: वर्गाकार आधार, गर्भगृह के ऊपर रेखीय शिखर, मंडप, और चबूतरे (जगाती) पर निर्माण।
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प्रमुख उदाहरण:
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खजुराहो के मंदिर (मध्य प्रदेश) – चंदेल शासक।
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कोणार्क का सूर्य मंदिर (ओडिशा) – नरसिंहदेव प्रथम।
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दशावतार मंदिर, देवगढ़ (ललितपुर, उत्तर प्रदेश) – गुप्त काल।
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2. द्रविड़ शैली (Dravidian Style)
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क्षेत्र: कृष्णा नदी से लेकर कन्याकुमारी तक (दक्षिण भारत)।
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विशेषताएं: पिरामिडनुमा शिखर (विमान), विशाल प्रवेश द्वार जिसे ‘गोपुरम’ कहा जाता है, और मंदिर परिसर में जलाशय/कुंड की उपस्थिति।
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प्रमुख उदाहरण:
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बृहदेश्वर मंदिर, तंजावूर (तमिलनाडु) – चोल शासक राजराज प्रथम।
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मीनाक्षी मंदिर, मदुरै – पांड्य शासक।
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3. वेसर शैली (Vesar Style)
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क्षेत्र: विंध्य पर्वत से कृष्णा नदी के मध्य (दक्कन क्षेत्र)।
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विशेषताएं: यह नागर और द्रविड़ शैलियों का मिश्रित रूप है।
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प्रमुख उदाहरण: होयसलेश्वर मंदिर (हेलेबिड), बादामी के चालुक्य मंदिर।
3. भारत के शास्त्रीय एवं लोक नृत्य (Classical and Folk Dances)
संगीत नाटक अकादमी के अनुसार भारत में 8 शास्त्रीय नृत्य स्वीकार किए गए हैं:
| शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance) | संबंधित राज्य (State) | मुख्य विशेषताएं / प्रसिद्ध कलाकार |
| भरतनाट्यम (Bharatanatyam) | तमिलनाडु | सबसे प्राचीन शैली; रुक्मिणी देवी अरुंडेल, यामिनी कृष्णमूर्ति |
| कथक (Kathak) | उत्तर प्रदेश | जयपुर एवं लखनऊ घराना; पंडित बिरजू महाराज, लच्छू महाराज |
| कथकली (Kathakali) | केरल | चेहरे पर विशेष मुखौटे एवं अभिनय; कथा-आधारित |
| मोहिनीअट्टम (Mohiniyattam) | केरल | एकल महिला नृत्य; भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से प्रेरित |
| कुचिपुड़ी (Kuchipudi) | आंध्र प्रदेश | मटका नृत्य एवं पीतल की थाली पर नृत्य; यामिनी कृष्णमूर्ति |
| ओडिसी (Odissi) | ओडिशा | त्रिभंग मुद्रा; केलुचरण महापात्र |
| सत्रिया (Sattriya) | असम | श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित वैष्णव परंपरा |
| मणिपुरी (Manipuri) | मणिपुर | रासलीला पर आधारित; झावेरी बहनें |
उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोक नृत्य (Folk Dances of UP):
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चरकुला: ब्रज क्षेत्र (सिर पर 108 दीपकों का पिंजरा रखकर किया जाने वाला नृत्य)।
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रासलीला एवं मयूर नृत्य: ब्रज क्षेत्र।
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कजरी एवं झूला: मिर्जापुर एवं पूर्वांचल क्षेत्र।
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ख्याल एवं धुरिया: बुंदेलखंड क्षेत्र (कुम्हार जाति द्वारा)।
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कर्मा एवं थारू: सोनभद्र एवं मिर्जापुर के आदिवासी क्षेत्रों में।
4. प्रमुख चित्रकला शैलियां (Indian Painting Traditions)
भारतीय चित्रकला परंपरा को दो भागों में बांटा जाता है — भित्ति चित्र (Mural Paintings) और लघु चित्रकला (Miniature Paintings)।
क. भित्ति चित्रकला:
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अजंता की गुफाएं (महाराष्ट्र): बौद्ध धर्म से संबंधित (जातक कथाएं)। फ्रेस्को (Fresco) तकनीक का प्रयोग।
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बाघ की गुफाएं (मध्य प्रदेश): गुप्त कालीन चित्रकला।
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सित्तनवासल (तमिलनाडु): जैन धर्म से संबंधित चित्र।
ख. लोक चित्रकला शैलियां (Folk Paintings):
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मधुबनी (मिथिला) चित्रकला: बिहार (प्राकृतिक रंगों और ज्यामितीय आकृतियों का प्रयोग)।
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पटचित्र: ओडिशा (कपड़े या ताड़ के पत्तों पर भगवान जगन्नाथ के चित्र)।
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वरली चित्रकला: महाराष्ट्र (आदिवासी कला, मिट्टी की दीवारों पर सफेद रंग से)।
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कलमकारी: आंध्र प्रदेश (सूती कपड़े पर हाथ से की जाने वाली चित्रकारी)।
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थांगका: हिमाचल प्रदेश एवं सिक्किम (बौद्ध धार्मिक चित्रकला)।
5. यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एवं विश्व धरोहर (UNESCO Cultural Heritage)
भारत में वर्तमान में कुल 43 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (35 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक, 1 मिश्रित) हैं।
भारत की प्रमुख अमूर्त सांस्कृतिक विरासतें (Intangible Cultural Heritage):
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कुंभ मेला (प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक)
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दुर्गा पूजा (कोलकाता)
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गरबा (गुजरात – 2023 में शामिल)
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वैदिक मंत्रोचार की परंपरा
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रामलीला और मुदियेट्टू
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छऊ नृत्य और कालवेलिया नृत्य (राजस्थान)
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नवरोज़ त्यौहार
6. अभ्यास हेतु 10 महत्वपूर्ण प्रश्न (Practice Questions for RO/ARO)
ये प्रश्न परीक्षा के नवीनतम पैटर्न पर आधारित हैं:
प्रश्न 1: मंदिर निर्माण की ‘नागर शैली’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
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नागर शैली के मंदिरों का निर्माण मुख्य रूप से उत्तर भारत में हुआ।
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इस शैली के मंदिरों में एक विशाल प्रवेश द्वार होता है जिसे ‘गोपुरम’ कहा जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
(अ) केवल 1
(ब) केवल 2
(स) 1 और 2 दोनों
(द) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर: (अ) केवल 1
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स्पष्टीकरण: कथन 1 सत्य है। कथन 2 असत्य है क्योंकि ‘गोपुरम’ (विशाल प्रवेश द्वार) द्रविड़ शैली (दक्षिण भारत) के मंदिरों की प्रमुख विशेषता है, न कि नागर शैली की।
प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन सा शास्त्रीय नृत्य उत्तर प्रदेश से संबंधित है?
(अ) भरतनाट्यम
(ब) कथकली
(स) कथक
(द) कुचिपुड़ी
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उत्तर: (स) कथक
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स्पष्टीकरण: कथक उत्तर प्रदेश का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य है। भरतनाट्यम (तमिलनाडु), कथकली (केरल) और कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश) से संबंधित हैं।
प्रश्न 3: प्रसिद्ध ‘चरकुला’ लोक नृत्य उत्तर प्रदेश के किस क्षेत्र से संबंधित है?
(अ) बुंदेलखंड
(ब) पूर्वांचल
(स) ब्रजभूमि
(द) अवध
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उत्तर: (स) ब्रजभूमि
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स्पष्टीकरण: चरकुला नृत्य ब्रज क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक नृत्य है, जिसमें महिलाएं सिर पर 108 दीपकों का चरकुला (पिंजरा) रखकर नृत्य करती हैं।
प्रश्न 4: ‘मधुबनी’ लोक चित्रकला शैली किस राज्य से संबंधित है?
(अ) ओडिशा
(ब) पश्चिम बंगाल
(स) बिहार
(द) राजस्थान
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उत्तर: (स) बिहार
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स्पष्टीकरण: मधुबनी या मिथिला चित्रकला बिहार राज्य के मिथिला क्षेत्र की एक प्रसिद्ध लोक कला है।
प्रश्न 5: ‘बृहदेश्वर मंदिर’ (तंजावूर) का निर्माण किस चोल शासक ने करवाया था?
(अ) राजेंद्र प्रथम
(ब) राजराज प्रथम
(स) प्रांतक प्रथम
(द) आदित्य प्रथम
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उत्तर: (ब) राजराज प्रथम
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स्पष्टीकरण: तंजावूर के प्रसिद्ध राजराजेश्वर या बृहदेश्वर शिव मंदिर का निर्माण चोल सम्राट राजराज प्रथम ने 11वीं शताब्दी में करवाया था। यह द्रविड़ शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रश्न 6: प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत शैली ‘ध्रुपद’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
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मध्यकाल में राजा मानसिंह तोमर ने ध्रुपद के गायन को प्रोत्साहन दिया।
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स्वामी हरिदास और तानसेन ध्रुपद शैली के महान गायक थे।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
(अ) केवल 1
(ब) केवल 2
(स) 1 और 2 दोनों
(द) न तो 1 और न ही 2
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उत्तर: (स) 1 और 2 दोनों
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स्पष्टीकरण: दोनों कथन सत्य हैं। ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर तथा स्वामी हरिदास एवं उनके शिष्य तानसेन ने ध्रुपद गायन को अत्यधिक समृद्ध बनाया।
प्रश्न 7: सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
| सूची-I (लोक कला) | सूची-II (राज्य) |
| A. कलमकारी | 1. महाराष्ट्र |
| B. वरली | 2. आंध्र प्रदेश |
| C. पटचित्र | 3. हिमाचल प्रदेश |
| D. थांगका | 4. ओडिशा |
सही कूट का चयन कीजिए:
(अ) A-2, B-1, C-4, D-3
(ब) A-1, B-2, C-3, D-4
(स) A-2, B-4, C-1, D-3
(द) A-4, B-1, C-2, D-3
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उत्तर: (अ) A-2, B-1, C-4, D-3
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स्पष्टीकरण: कलमकारी (आंध्र प्रदेश), वरली (महाराष्ट्र), पटचित्र (ओडिशा) और थांगका (हिमाचल प्रदेश/सिक्किम) से सुमेलित हैं।
प्रश्न 8: निम्नलिखित में से कौन सा मंदिर ‘पंचायतन शैली’ का उदाहरण है?
(अ) कंदरिया महादेव मंदिर (खजुराहो)
(ब) दशावतार मंदिर (देवगढ़)
(स) लिंगराज मंदिर (भुवनेश्वर)
(द) उपर्युक्त सभी
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उत्तर: (द) उपर्युक्त सभी
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स्पष्टीकरण: पंचायतन शैली नागर शैली का ही एक रूप है जिसमें मुख्य मंदिर के चारों कोनों पर चार सहायक मंदिर होते हैं। कंदरिया महादेव, देवगढ़ का दशावतार और भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर पंचायतन शैली के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
प्रश्न 9: यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल होने वाला 15वां भारतीय सांस्कृतिक रूप कौन सा है?
(अ) दुर्गा पूजा
(ब) गरबा
(स) कुंभ मेला
(द) छऊ नृत्य
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उत्तर: (ब) गरबा
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स्पष्टीकरण: दिसंबर 2023 में गुजरात के प्रसिद्ध लोक नृत्य ‘गरबा’ को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में 15वें भारतीय रूप के रूप में शामिल किया गया था। (दुर्गा पूजा 14वां था)।
प्रश्न 10: उत्तर प्रदेश में स्थित ‘दशावतार मंदिर’ किस काल की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है?
(अ) मौर्य काल
(ब) कुषाण काल
(स) गुप्त काल
(द) वर्धन काल
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उत्तर: (स) गुप्त काल
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स्पष्टीकरण: उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के देवगढ़ में स्थित ‘दशावतार मंदिर’ भगवान विष्णु को समर्पित गुप्तकालीन उत्तर भारतीय (नागर शैली) स्थापत्य का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।
7. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण रणनीतिक सुझाव (Strategy Tips)
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मानचित्र (Map) आधारित अध्ययन: कला रूपों, लोक नृत्यों और मंदिरों को भारत तथा उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर चिन्हित करके याद करें।
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उत्तर प्रदेश विशेष पर ध्यान दें: यूपीPSC द्वारा आयोजित परीक्षा होने के कारण लखनऊ घराना, बनारस घराना, बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र के लोक कला रूपों पर विशेष ध्यान दें।
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पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र (PYQs): आयोग द्वारा पिछले 10-15 वर्षों में कला एवं संस्कृति से पूछे गए प्रश्नों को बार-बार रिवाइज करें।
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